हिंदू शब्द का इतिहास ....
शब्द कल्पद्रुम(दूसरी शताब्दी) में कहा है,
“हीनं दुष्यति इति हिन्दू जाति विशेष:”।
हीन कर्म का त्याग करने वाले को हिन्दू कहते हैं।
अद्भुत कोष में कहा है,
“हिन्दू हिंदुश्च प्रसिद्धौ दुष्टानां च विघर्षने।”
हिन्दू और हिंदु दोनों शब्द दोनों शब्द दुष्टोम को नष्ट करने वाले अर्थ में प्रसिद्ध है।
बृहद स्मृति(छठीं शताब्दी);
“हिंसया दुयते यश्च सदाचरण तत्पर: वेद ..हिंदु मुख शब्द
भाक्।”
जो सदाचारी वैदिक मार्ग पर चलने वाला,हिंसा से दुःख
मानने वाला है,वह हिन्दू है।
बृहस्पति आगम : विशालाक्ष शिव द्वारा रचित राजनीति के महान शास्त्र का संक्षित महर्षि बृहस्पतिजी ने बार्हस्पत्य शात्र नाम से किया। फिर वराहमिहिर ने एक शास्त्र लिखा जिसका नाम बृहत्संहिता है। इसके बाद बृहस्पति-आगम की रचना हुई। 'बृहस्पति आगम' सहित अन्य आगम ईरानी या अरबी सभ्यताओं से बहुत प्राचीनकाल में लिखा जा चुके थे। अतः उसमें 'हिन्दुस्थान' का उल्लेख होने से स्पष्ट है कि हिन्दू (या हिन्दुस्थान) नाम प्राचीन ऋषियों द्वारा दिया गया था न कि अरबों/ईरानियों द्वारा। यह नाम बाद में अरबों/ईरानियों द्वारा प्रयुक्त होने लगा। हालांकि इस आगम को आधुनिक काल में लिखा गया माना जाता है।
इसके एक श्लोक में कहा गया है:-
ॐकार मूलमंत्राढ्य: पुनर्जन्म दृढ़ाशय:
गोभक्तो भारतगुरु: हिन्दुर्हिंसनदूषक:।
हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दुरितीरित:।
'ॐकार' जिसका मूल मंत्र है, पुनर्जन्म में जिसकी दृढ़ आस्था है, भारत ने जिसका प्रवर्तन किया है तथा हिंसा की जो निंदा करता है, वह हिन्दू है।
श्लोक : 'हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥'- (बृहस्पति आगम)
अर्थात : हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।
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