माझी इतकी मोठी अशी ही पहिलीच उर्दूप्रचुर कविता. पण सर्वाना वाचता यावी म्हणून देवनागरी लिपीत लिहिली आहे. अभिप्राय द्यावा.
जाऊ कभी मैं हार,
तो तुम होसला बन जाना.
आयेगी कभी मुश्किल,
तो तुम हिम्मत बन जाना.
हो जाये जब सब पराये,
तो तुम अपने बन जाना.
दूर करे जब सब मुझे,
तो तुम मेरी सांसे बन जाना.
बोलो,
क्या जमेगी हमारी बात?
क्या होगी मुलाकात?
क्या थामोगी मेरा हाथ?
जब कोई जवाब ना आये,
तो तुम आवाज बन जाना.
जब कभी अंधेरा छा जाये,
तो तुम चिराग बन जाना.
क्या तुम बनोगी मेरी आंखे?
क्या तुम बनोगी मेरी सांसे?
क्या तुम बनोगी मेरी बाते?
क्या होगी खुशनुमा ये राते?
आपकी सदा का इंतजार है हमे,
मुलाकात के लिये बेकरार है लम्हे ।।
सचिन श्रीकांत भिडे
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