मै पूर्ण हूं, संपूर्ण हूं, मै काल हूं, महाकाल हूं,
मै नारीनर हूं सकल हूं, मै चंद्रधर फणीधर भी हूं
मुझसे है विश्व, मै विश्व हूं, ब्रह्माण्ड संहारक भी हूं
मै आदि अंत हूं, श्वास हूं, अनादि हूं निश्वास हूं
मै ज्वाल हूं प्रलयंकरी, गंगा भी है सिर पे धरी
मै मदनमार हूं, विष भी हूं, अमृतधरा का सर भी हूं
मै शिव भी हूं, शक्ती भी हूं, मै प्रेम हूं, भक्ती भी हूं,
मै सकल लोक हूं, व्याप्त हूं, मै अमर अजर पर्याप्त हूं
मै तुझमे हूं, मै मुझमे हूं, मुझमे सभी, मै सब मे हूं
मै तुझमे हूं, मै मुझमे हूं, मुझमे सभी, मै सब मे हूं
*****श्रीदत्तचरणरज*****
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